महाभारत में वर्णित ये 35 नगर आज भी हैं मौजूद.


महाभारत में वर्णित ये 
35 नगर आज भी हैं मौजूद :-


आलेख:- आचार्य शुभ दर्शन✍️

हमारा भारत देश महाभारत काल में कई बड़े जनपदों में बंटा हुआ था।
आज हम आपको अपने भारत के प्राचीन इतिहास के झरोखों में से ऐसे हीं कुछ राज्यों और नगरों से रूबरू कराने जा रहे हैं। आज मैं महाभारत में वर्णित जिन 35 राज्यों और शहरों के बारे में प्रामाणिक तौर पर ज़िक्र करने जा रहा हुँ, जो कि आज भी मौजूद हैं।

♦️1. गांधार👉
 आज के कंधार को कभी गांधार के रूप में जाना जाता था। यह देश पाकिस्तान के रावलपिन्डी से लेकर सुदूर अफ़ग़ानिस्तान तक फैला हुआ था। धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी वहां के राजा सुबल की पुत्री थी। गांधारी के भाई शकुनी थे जो कि दुर्योधन के मामा थे।

♦️2. तक्षशिला👉
तक्षशिला गांधार देश की राजधानी थी। इसे वर्तमान में रावलपिन्डी कहा जाता है। तक्षशिला को ज्ञान और शिक्षा की राजधानी कहा जाता था। प्राचीन काल में विश्व भर के लोग यहाँ शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते थे।


♦️3. केकय प्रदेश👉
जम्मू-कश्मीर के उत्तरी भाग के इस इलाके का उल्लेख महाभारत में केकय प्रदेश के रूप में है।
कहा जाता है कि माता कैकेई यहीं की थीं। द्वापर युग के अंत में महाभारत काल के समय में केकय प्रदेश के राजा जयसेन का विवाह वसुदेव की बहन राधादेवी के साथ हुआ था। उनका पुत्र विन्द दुर्योधन का मित्र था। महाभारत के युद्ध में विन्द ने कौरवों का साथ दिया था।

♦️4. मद्र देश👉
केकय प्रदेश से ही सटा हुआ मद्र देश का आशय जम्मू-कश्मीर से ही है। एतरेय ब्राह्मण के मुताबिक, हिमालय के नज़दीक होने की वजह से मद्र देश को उत्तर कुरू भी कहा जाता था। महाभारत काल में मद्र देश के राजा शल्य थे, जिनकी बहन माद्री का विवाह राजा पाण्डु से हुआ था। नकुल और सहदेव माद्री के पुत्र थे।



♦️5. उज्जनक👉
आज के नैनीताल का ज़िक्र महाभारत में उज्जनक के रूप में किया गया है। गुरु द्रोणचार्य यहाँ पांडवों और कौरवों की
अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दिया करते थे। कुन्ती पुत्र भीम ने गुरु द्रोण के आदेश पर यहां एक शिवलिंग की स्थापना की थी। यही वजह है कि इस क्षेत्र को भीमशंकर के नाम से भी जाना जाता है। यहां भगवान् शिव का एक विशाल मंदिर है।
यहीं पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं।

♦️6. शिवि देश👉
महाभारत काल में दक्षिण पंजाब को हीं शिवि देश कहा जाता था। महाभारत में महाराज उशीनर का ज़िक्र मिलता है, जिनके पौत्र शैव्य थे। शैव्य की पुत्री देविका का विवाह युधिष्ठिर से हुआ था। शैव्य एक महान धनुर्धर और कुशल योद्धा थे और उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों का साथ दिया था।

♦️7. वाणगंगा👉
कुरुक्षेत्र से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है वाणगंगा। कहा जाता है कि महाभारत की भीषण लड़ाई में घायल पितामह भीष्म को यहां सर-सैय्या पर लिटाया गया था। कथा के मुताबिक, पितामह भीष्म ने प्यास लगने पर जब जल की मांग की तो अर्जुन ने अपने वाणों से धरती पर प्रहार किया और गंगा की धारा प्रस्फुटित हुई।
यही वजह है कि इस स्थान को वाणगंगा कहा जाता है।

♦️8. कुरुक्षेत्र👉
हरियाणा के अम्बाला इलाके को कुरुक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। यहांँ महाभारत की प्रसिद्ध लड़ाई हुई थी। यही नहीं, आदिकाल में ब्रह्माजी ने यहां यज्ञ का आयोजन किया था। इस स्थान पर एक ब्रह्म सरोवर या ब्रह्मकुंड भी है। श्रीमद् भागवत में लिखा हुआ है कि महाभारत के युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने यदुवंश के अन्य सदस्यों के साथ इस सरोवर में स्नान किया था।
यहाँ की मिट्टी आज की सभी जगहों से अधिक रक्तवर्णा है।

♦️9. हस्तिनापुर👉
महाभारत में उल्लेखित हस्तिनापुर का इलाका मेरठ के आसपास है। यह स्थान चन्द्रवंशी राजाओं की राजधानी थी। सही मायने में महाभारत युद्ध की पटकथा यहीं लिखी गई थी। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने हस्तिनापुर को अपने राज्य की राजधानी बनाया।

♦️10. वर्नावत👉
यह स्थान भी उत्तर प्रदेश के मेरठ के नजदीक ही माना जाता है। वर्णावत में पांडवों को छल से मारने के लिए दुर्योधन ने लाक्षागृह का निर्माण करवाया था। यह स्थान गंगा नदी के किनारे है।
यही नहीं यहांँ आज भी वो गुफानुमा जगह मौजूद हैं जहाँ इस बात का पुख्ता सबूत मिलता है।
यहाँ वार्णावत नामक एक गाँव आज भी मौजूद है।

♦️11. पांचाल प्रदेश👉
हिमालय की तराई का इलाका पांचाल प्रदेश के रूप में उल्लेखित है। पांचाल के राजा द्रुपद थे, जिनकी पुत्री द्रौपदी का विवाह अर्जुन के साथ हुआ था। द्रौपदी को पांचाली के नाम से भी जाना जाता है।

♦️12. इन्द्रप्रस्थ👉
आज के समय में दक्षिणी दिल्ली के इलाके का वर्णन महाभारत में इन्द्रप्रस्थ के रूप में है। कथा के मुताबिक, इस स्थान पर एक वियावान जंगल था, जिसका नाम खांडवप्रस्थ था। भगवान् श्रीकृष्ण के आदेश पर विश्वकर्मा की मदद से पांडवों ने यहां अपनी राजधानी बनाई थी। इन्द्रप्रस्थ नामक छोटा सा कस्बा आज भी यहाँ मौजूद है।

♦️13. श्रीधाम वृन्दावन👉 
यह स्थान मथुरा से करीब 10 किलोमीटर दूर है। वृन्दावन को भगवान कृष्ण की बाल-लीलाओं के लिए जाना जाता है।

♦️14. गोकुल👉
यमुना नदी के किनारे बसा हुआ यह स्थान भी मथुरा से करीब 8 किलोमीटर दूर है। कंस से रक्षा के लिए कृष्ण के पिता वसुदेव ने उन्हें अपने मित्र नंदराय के घर गोकुल में छोड़ दिया था। भगवान् कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम गोकुल में साथ-साथ पले-बढ़े थे।

♦️15. बरसाना👉 
यह स्थान भी उत्तर प्रदेश के मथुरा में है। ये ब्रज धाम की महारानी श्री राधारानी का निवास्थान है।

♦️16. मथुरा👉 
यमुना नदी के किनारे बसा हुआ यह प्रसिद्ध शहर हिन्दू धर्म के लिए अनुयायियों के लिए बेहद प्रसिद्ध है। यहां राजा कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यहीं पर श्रीकृष्ण ने बाद में कंस का उद्धार किया था। बाद में कृष्ण के पौत्र वृजनाथ को मथुरा की राजगद्दी दी गई।

♦️17. अंग देश👉
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के इलाके का उल्लेख महाभारत में अंगदेश के रूप में मिलता है। दुर्योधन ने कर्ण को इसी देश का राजा घोषित किया था।
मान्यताओं के अनुसार, मगध देश के राजा जरासंध ने अंग देश दुर्योधन को उपहारस्वरूप भेंट किया था।

♦️18. कौशाम्बी👉
कौशाम्बी वत्स देश की राजधानी थी। वर्तमान में इलाहाबाद के नज़दीक है। इस नगर के लोगों ने महाभारत के युद्ध में कौरवों का साथ दिया था। बाद में कुरुवंशियों ने कौशाम्बी पर अपना अधिकार कर लिया। परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने कौशाम्बी को अपनी राजधानी बनाया था।

♦️19. काशी👉
महादेव की नगरी काशी आदिकाल से है।
महाभारत काल में भी काशी को शिक्षा का गढ़ माना जाता था। महाभारत की कथा के मुताबिक, पितामह भीष्म काशीनरेश की पुत्रियों अम्बा, अम्बिका और अम्बालिका को हर कर ले गए थे ताकि उनका विवाह विचित्रवीर्य से कर सकें। अम्बा राजा शल्य से प्रेम करती थी।
इसलिए उसने विचित्रवीर्य से विवाह से इन्कार कर दिया। अम्बिका और अम्बालिका का विवाह विचित्रवीर्य के साथ कर दिया गया। विचित्रवीर्य के अम्बा और अम्बालिका से दो पुत्र धृतराष्ट्र और पान्डु हुए। बाद में धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव कहलाए और पान्डु के पांडव।

♦️20. एकचक्र नगरी👉
वर्तमान कालखंड में बिहार का आरा जिला महाभारत काल में एकचक्रनगरी के रूप में जाना जाता था। लाक्षागृह की साज़िश से बचने के बाद पांडव काफी समय तक एकचक्रनगरी में रहे थे। इस स्थान पर भीम ने बकासुर नामक एक राक्षक का अन्त किया था। महाभारत युद्ध के बाद जब युधिष्ठिर ने अश्वमेध यज्ञ किया था, उस समय बकासुर के पुत्र भीषक ने उनका घोड़ा पकड कर रख लिया था। बाद में वह अर्जुन के हाथों मारा गया।




♦️21. मगध देश👉
बिहार में मौजूद मगध देश राजा जरासंध की राजधानी थी। जरासंध की दो पुत्रियां थीं अस्ती और प्राप्ति जिसका विवाह कंस से हुआ था।
जब भगवान् श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया, तब वह महाराजा जरासंध अनायास ही श्रीकृष्ण के शत्रु बन बैठे।
जरासंध ने मथुरा पर कई बार हमला किया। बाद में एक मल्लयुद्ध के दौरान भीम ने जरासंध का अंत किया। महाभारत के युद्ध में मगध की जनता ने पांडवों का समर्थन किया था।


♦️22. पुन्डरू देश👉
मौजूदा समय में बिहार के इस स्थान पर राजा पोन्ड्रक का राज था। पोन्ड्रक जरासंध का मित्र था और उसे लगता था कि वह हीं कृष्ण है। उसने न केवल कृष्ण का वेश धारण किया था, बल्कि उसने अपने साथ दो और नक़ली भुजा लगवाया था। उसे वासुदेव और पुरुषोत्तम कहलवाना पसन्द था। द्रौपदी के स्वयंवर में वह भी मौजूद था। कृष्ण से उसकी दुश्मनी जगज़ाहिर थी। द्वारका पर एक आक्रमण के दौरान वह भगवान श्रीकृष्ण के हाथों उद्धार हुआ था।

♦️23. प्रागज्योतिषपुर👉
आज के असम में स्थित गुवाहाटी का उल्लेख महाभारत में प्रागज्योतिषपुर के रूप में मिलता है। महाभारत काल में यहां व्योमासुर का राज था, जिसने अलग-अलग देशों के कुल सोलह हज़ार रानियों को बन्दी बना रखा था। बाद में श्रीकृष्ण ने उसका वध करके सभी 16 हजार रानियों को वहां से मुक्त किया।
तब सभी रानियों के अपने देश ना लौट भगवान् श्रीकृष्ण से विवाह करने की इच्छा प्रगट की। तब उन्होंने सभी से एक साथ विवाह किया।
यहीं माता के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माता कामख्या देवी का मंदिर स्थित हैं। इसे आदिकाल से हीं काला जादू और तंत्र का गढ़ कहा जाता था। भीम के पुत्र घटोत्कच यहीं के थे।


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♦️25. मणिपुर👉
नागालैन्ड, असम, मिजोरम और वर्मा से घिरा हुआ मणिपुर महाभारत काल से भी पुराना है। मणिपुर के राजा चित्रवाहन की पुत्री चित्रांगदा का विवाह अर्जुन के साथ हुआ था। इस विवाह से एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम था बभ्रुवाहन। राजा चित्रवाहन की मृत्यु के बाद बभ्रुवाहन को यहां का राजपाट दिया गया। बभ्रुवाहन ने युधिष्ठिर द्वारा आयोजित किए गए राजसूय यज्ञ में भाग लिया था।

♦️26. सिन्धु देश👉
सिन्धु देश का तात्पर्य प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता से है। यह स्थान न केवल अपनी कला और साहित्य के लिए विख्यात था, बल्कि वाणिज्य और व्यापार में भी अग्रणी था।
यहां के राजा जयद्रथ का विवाह धृतराष्ट्र की पुत्री दुःश्शाला के साथ हुआ था। महाभारत के युद्ध में जयद्रथ ने कौरवों का साथ दिया था और चक्रव्युह के दौरान अभिमन्यू की मौत में उसकी बड़ी भूमिका थी।

♦️27. मत्स्य देश👉
राजस्थान के उत्तरी इलाके का उल्लेख महाभारत में मत्स्य देश के रूप में है। इसकी राजधानी थी विराटनगर। अज्ञातवास के दौरान पांडव वेश बदल कर महाराजा विराट के सेवक बन कर रहे थे। यहां अर्जुन के पुत्र अभिमन्यू का विवाह राजा विराट की पुत्री उत्तरा के साथ हुआ था।

♦️28. मुचकुन्द तीर्थ👉
यह स्थान धौलपुर, आज के राजस्थान के समीप था। मथुरा पर जीत हासिल करने के बाद कालयावन ने भगवान् श्रीकृष्ण का पीछा किया तो उन्होंने खुद को एक गुफा में छुपा लिया। उस गुफा में मुचकुन्द सो रहे थे, उन पर कृष्ण ने अपना पीताम्बर डाल दिया। कृष्ण का पीछा करते हुए कालयावन भी उसी गुफा में आ पहुंचा। मुचकुन्द को कृष्ण समझकर उसने उन्हें जगा दिया। जैसे ही मुचकुन्द ने आंख खोला तो कालयावन जलकर भस्म हो गया। मान्यताओं के मुताबिक, महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद जब पांडव हिमालय की तरफ चले गए और कृष्ण गोलोक निवासी हो गए, तब कलयुग ने पहली बार यहां अपने पग रखे थे।

♦️29. पाटन👉
महाभारत की कथा के मुताबिक, गुजरात का पाटन द्वापर युग में एक प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र था। पाटन के नज़दीक ही भीम ने हिडिम्ब नामक राक्षस का संहार किया था और उसकी बहन हिडिम्बा से विवाह किया। हिडिम्बा ने बाद में एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम था घटोत्कच्छ था और उनके पुत्र बर्बरीक की कहानी महाभारत में विस्तार से दी गई है।

♦️30. द्वारका पुरी👉
 माना जाता है कि गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित यह स्थान कालान्तर में समुन्दर में समा गया था। कथाओं के मुताबिक, जरासंध के बार-बार के आक्रमण से यदुवंशियों को बचाने के लिए कृष्ण मथुरा से अपनी राजधानी स्थानांतरित कर द्वारका ले गए।
हालांकि इसके पीछे भी विस्तृत कथा है, जिसका वर्णन फिर कभी करुंगा।

♦️31. प्रभाष क्षेत्र 👉
गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित है यह स्थान। इसका वर्णन महाभारत और श्रीमद्भागवत महापुराण में भी मिलता है।
 महाभारत कथा के मुताबिक़, यहां भगवान श्रीकृष्ण पैर के अंगूठे में तीर लगने की वजह से घायल हो गए थे। उनके गोलोकवासी होने के बाद द्वारका नगरी समुन्द्र में समा गई थी।

♦️32. अवन्तिका पुरी
मध्यप्रदेश के अवन्तिका पुरी व आज के उज्जैन का उल्लेख महाभारतकाल मे भी मिलता है। 
आदिकाल से हीं सभी सात महानगरों में से एक अवन्तिका पुरी का भी नाम आता है।
पहले पुरे भारत का समय केन्द्र यहीं था।
यहीं पर महर्षि सांदीपनि का आश्रम था। जो की श्रीकृष्ण और बलराम के गुरु थे।
आज भी वो वटवृक्ष यहाँ मौजूद है जिसके नीचे महर्षि सांदीपनि पढ़ाते थे।
यहीं भगवान् शिव के द्वादश ज्योर्तिलिंगों में से एक बाबा महाकाल का ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं।
बाद में महाराज विक्रमादित्य द्वारा पुरे भारत की राजधानी घोषित किया गया था।


♦️33. चेदी👉
वर्तमान में ग्वालियर क्षेत्र को महाभारत काल में चेदी देश के रूप में जाना जाता था। गंगा व नर्मदा के मध्य स्थित चेदी महाभारत काल के संपन्न नगरों में एक था। इस राज्य पर शिशुपाल का अधिकार था।
युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के समय चेदी नरेश शिशुपाल को भी आमंत्रित किया गया था। जिसमें शिशुपाल ने यहांँ श्रीकृष्ण को बुरा-भला कहा, तो कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका गला काट दिया था।

♦️34. सोणितपुर👉
मध्यप्रदेश के इटारसी में महाभारत काल में सोणितपुर के नाम से जाना जाता था। सोणितपुर पर वाणासुर का राज था। वाणासुर की पुत्री उषा का विवाह भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के साथ सम्पन्न हुआ था। इस स्थान पर हिन्दुओं के लिए एक पवित्र तीर्थ भी है।

♦️35. विदर्भ देश👉
महाभारतकाल में विदर्भ क्षेत्र पर जरासंध के मित्र राजा भीष्मक का शासन था। रुक्मिणी भीष्मक की पुत्री थीं। भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का अपहरण कर उनसे विवाह रचाया था। यही वजह थी कि भीष्मक उन्हें अपना शत्रु मानने लगे। जब पांडवों ने अश्वमेध यज्ञ किया था, तब भीष्मक ने उनका घोड़ा रोक लिया था। सहदेव ने भीष्मक को युद्ध में हरा दिया।

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